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काजल कुमारी पटना बिहार की शान हैं।

बिहार की काजल कुमारी जो कि किसी पहचान की मोहताज नहीं उन्हें मिला ज्योतिष शिरोमणि अवार्ड । बहुत बहुत शुभकामनाएं ।

रेड लाइट एरिया की महिलाए

  एक दुनिया अनकही सी जहां हर रात सजी चमक-दमक के पीछे छुपी एक दुनिया अनकही सी, जहां हर रात सजी महफ़िल, पर हर सुबह तन्हा गालियां रही वही सी। ये औरतें, ना कहानियाँ हैं ना कोई कलाकार हैं ।ये हैं ज़िंदा कठपुतलियां जो हर दर्द को खुद ही समेटे इनकी जिम्मेदार हैं । न शौक से  ना था ये कोई सपना कभी मजबूरी कभी धोखा दे गया कोई अपना ,ना आई वो शौक से इस में आई वो भी चाहती थी अपनी इज्ज़त ढकना । वक्त की मार से जो कभी माँ - बाप की बचपन में थी गुड़ियों, आज इस दलदल में आकर ढूंढती हैं मरने के लिए जहर की पुड़िया , आज वही खेल बन गई हैं वक्त के हाथों में जा कर, शरीफ अपनी शराफ़त रखते हैं आज उसे वैश्या कह उसके आंगन में आकर। एक करुण क्रन्दन, एक वेदना, ये हँसियाँ रोज़ आइनों के सामने, पर मन रोता है डर जी भर के हैं उसके रग रग नहीं हैं कोई जीवन भर को हाथ थमाने। हर रात जो सजी हैं दुल्हन सी, उनके मन में कोई दीया नहीं जलता, सिर्फ एक रिश्ता बिकता है जो उसके जिस्म की कीमत होती  पर आत्मा हर बार बिखरता । कभी कोई रेखा थी, कभी पूजा अब बस नाम से ही डील होती हैं उसके इज्ज़त की बिकने को, इसका सच किसी को नहीं दिखता...

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कैसा होगा बोधगया ब्राह्मणों के बिना ।

बोधगया, जो बौद्ध धर्म का प्रमुख तीर्थ स्थल है, भारतीय उपमहाद्वीप में एक ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। यहाँ पर भगवान बुद्ध ने बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त किया था, जिससे बौद्ध धर्म की नींव रखी गई। इस स्थल की शान और गरिमा की साक्षी महाबोधि मंदिर है, जिसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में घोषित किया गया है। अब प्रश्न यह उठता है कि क्या ब्राह्मणों के बिना बोधगया की शान बरकरार रहेगी? ब्राह्मणों का बोधगया में ऐतिहासिक प्रभाव रहा है। हिन्दू धर्म और बौद्ध धर्म के बीच कई सदियों तक धार्मिक संघर्ष और समन्वय का इतिहास रहा है। हालांकि बोधगया मुख्य रूप से बौद्धों का पवित्र स्थल है, लेकिन इस स्थल पर हिंदू धर्म का भी ऐतिहासिक जुड़ाव है। यह सच है कि महाबोधि मंदिर का निर्माण और इसके बाद के काल में ब्राह्मणों का धार्मिक प्रभाव और पूजा पद्धतियों में एक निश्चित भूमिका रही है। ब्राह्मणों के बिना बोधगया की शान की रक्षा की बात करें तो यह मुद्दा कई दृष्टिकोणों से देखा जा सकता है: धार्मिक शुद्धता: बोधगया मुख्य रूप से बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए पवित्र स्थल है, और इसक...

UCC क्या हैं सम्पूर्ण जानकारी।

UCC (Uniform Civil Code) या "समान नागरिक संहिता" भारतीय संविधान में वर्णित एक ऐसा कानूनी सिद्धांत है, जिसका उद्देश्य भारत में सभी नागरिकों के लिए एक समान निजी कानून लागू करना है, बिना धर्म, जाति, पंथ या समुदाय के आधार पर भेदभाव किए। वर्तमान में, भारत में विभिन्न धर्मों के अनुसार व्यक्तिगत कानून होते हैं, जैसे कि हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सिख, और अन्य धर्मों के लिए अलग-अलग विवाह, तलाक, संपत्ति और उत्तराधिकार के नियम हैं। UCC का उद्देश्य इन विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों को समाप्त करके एक सामान्य और समान कानून लागू करना है, जिससे सभी नागरिकों को समान अधिकार और अवसर मिलें। UCC की आवश्यकता धार्मिक विविधता और असमानता: भारत एक धार्मिक विविधता वाला देश है, जहां विभिन्न समुदायों के लिए अलग-अलग कानूनी प्रावधान हैं। उदाहरण के लिए, हिंदू धर्म के अनुयायी भारतीय हिंदू विवाह अधिनियम के तहत विवाह और तलाक के मामलों में नियमों का पालन करते हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय शरियत कानून के तहत अपने व्यक्तिगत मामलों को सुलझाता है। ऐसे में, अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग नियम होने से समानता की भावना पर असर पड़ता ...

मणिपुर में Afspa क्यों नहीं हटेगा ? क्या हैं ये ।

मणिपुर में AFSPA (अफ्स्पा) का मुद्दा बहुत संवेदनशील और जटिल है। यह कानून 1958 में लागू किया गया था, जिसका उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में उग्रवाद और अस्थिरता को नियंत्रित करना है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में मणिपुर में इस कानून के खिलाफ व्यापक विरोध हुआ है, लेकिन इसे हटाने की दिशा में ठोस कदम उठाना अभी भी चुनौतीपूर्ण है। 1. सुरक्षा स्थिति मणिपुर में सुरक्षा स्थिति अभी भी नाजुक है। विभिन्न उग्रवादी समूह सक्रिय हैं, जो सरकार के खिलाफ हथियार उठाए हुए हैं। सरकार का तर्क है कि AFSPA की उपस्थिति आवश्यक है ताकि सुरक्षा बलों को सख्ती से कार्य करने की स्वतंत्रता मिले। यदि यह कानून हटाया जाता है, तो सुरक्षा बलों के हाथ बंध जाएंगे, जिससे उग्रवादियों को बढ़ावा मिल सकता है। 2. राजनीतिक और सामाजिक दबाव हालांकि AFSPA के खिलाफ कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने आवाज उठाई है, लेकिन राजनीतिक नेतृत्व इसे हटाने के लिए सहमत नहीं है। केंद्रीय और राज्य सरकारों के बीच की राजनीति भी इस मुद्दे को जटिल बनाती है। कई स्थानीय राजनीतिक दलों का मानना है कि AFSPA को हटाने से उनकी सुरक्षा और स्थिरता पर प...

UPSC की तयारी इस प्रकार करके पहले प्रयास में सफ़लता पाएं ।

UPSC (Union Public Service Commission) की तैयारी एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है, लेकिन सही रणनीति और समर्पण के साथ पहले प्रयास में सफलता प्राप्त की जा सकती है। यहाँ कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई है जो आपकी तैयारी को प्रभावी बनाएंगे। 1. सिलेबस को समझें: UPSC सिलेबस बहुत विस्तृत है, इसलिए पहले इसकी गहरी समझ हासिल करें। सामान्य अध्ययन, वैकल्पिक विषय, और निबंध के सिलेबस को ध्यान से पढ़ें। सिलेबस के हर हिस्से पर ध्यान दें और उसके अनुसार अपनी तैयारी की रूपरेखा बनाएं। 2. समय प्रबंधन: समय प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण है। अपनी दिनचर्या में एक निश्चित समय सारणी बनाएं, जिसमें अध्ययन के लिए निश्चित घंटे निर्धारित करें। सभी विषयों को समुचित समय दें और हर दिन की प्रगति पर नजर रखें। 3. सामग्री का चयन: सही अध्ययन सामग्री का चयन करें। NCERT की किताबें प्रारंभिक स्तर के लिए बहुत उपयोगी होती हैं। इसके बाद, अन्य महत्वपूर्ण किताबें और सामग्रियाँ जैसे कि Laxmikant की "Indian Polity", Bipin Chandra की "India's Struggle for Independence", और अन्य विषयों के लिए विशिष्ट किताबें पढ़ें। 4....